Q.1. सहसंयोजक बंध क्या है?
उत्तर: जब दो परमाणु अपने बाह्य कक्षा के इलेक्ट्रॉनों को साझा करके अणु बनाते हैं, तो बनने वाले बंध को सहसंयोजक बंध कहते हैं।
उदाहरण: H₂ (हाइड्रोजन अणु), O₂ (ऑक्सीजन अणु), CH₄ (मीथेन)
👉 मीथेन में कार्बन और हाइड्रोजन के बीच सहसंयोजक बंध होता है।
Q.2. समजातीय श्रेणी को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: समान सामान्य सूत्र, समान कार्यात्मक समूह तथा समान रासायनिक गुणों वाले कार्बनिक यौगिकों के समूह को समजातीय श्रेणी कहते हैं।
उदाहरण: एल्कोहॉल की समजातीय श्रेणी
यौगिक रासायनिक सूत्र
मेथेनॉल CH₃OH
एथेनॉल C₂H₅OH
प्रोपेनॉल C₃H₇OH
विशेषता: प्रत्येक अगले सदस्य में –CH₂– समूह का अंतर होता है।
Q.3. कार्बन की सहसंयोजकता को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: कार्बन का परमाणु चार इलेक्ट्रॉनों से भरा नहीं होता, इसलिए यह चार अन्य परमाणुओं के साथ अपने बाह्य इलेक्ट्रॉनों को साझा कर सकता है और सहसंयोजक बंध बनाता है। इसी गुण को कार्बन की सहसंयोजकता कहते हैं।
उदाहरण
यौगिक का नाम सूत्र बंध की प्रकार
मीथेन CH₄ चार एकल बंध
एथीन C₂H₄ एक दोहरी बंध + चार एकल बंध
एथाइन C₂H₂ एक तिहरी बंध + दो एकल बंध
Q.4. एथेनॉल के निर्माण, गुण एवं उपयोग लिखिए।
उत्तर: एथेनॉल के निर्माण, गुण एवं उपयोग
1. निर्माण-
किण्वन विधि
शक्कर या अनाज के घोल में यीस्ट डालने पर एथेनॉल बनता है।
2. गुण-
रंगहीन और ज्वलनशील तरल।
पानी में घुलनशील।
तीखा स्वाद।
क्वथनांक ≈ 78°C।
3. उपयोग-
ईंधन – स्पिरिट लैम्प, बायोफ्यूल।
दवा एवं सैनेटाइज़र – एल्कोहॉल बेस्ड।
इत्र और पेंट उद्योग – विलायक के रूप में।
रासायनिक उद्योग – एसीटिक अम्ल, एस्टर आदि के निर्माण में।
Q.5. एसीटिक अम्ल के गुण, उपयोग एवं अभिक्रियाएँ लिखिए।
उत्तर:
एसीटिक अम्ल – गुण, उपयोग एवं अभिक्रियाएँ
1. भौतिक गुण
- रंगहीन तरल, तेज गंध वाला।
- पानी में पूरी तरह घुलनशील।
- क्वथनांक लगभग 118°C।
- स्वाद तीखा और खट्टा।
2. रासायनिक गुण
2 CH3COOH + Mg →(CH3COO)2Mg + H2 ↑
- सोडियम कार्बोनेट/सोडियम बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया:
2 CH3COOH + Na2CO3 → 2 CH3COONa + H2O + CO2 ↑
CH3COOH + C2H5OH → (H2SO4) CH3COOC2H5 + H2O
- धातु हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया:
CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
3. उपयोग
- खाद्य उद्योग – अचार और सिरका बनाने में।
- रासायनिक उद्योग – एस्टर और एसीटिक अम्ल के निर्माण में।
- औद्योगिक उपयोग – रंग, डाई, इत्र और सॉल्वेंट के रूप में।
- प्रयोगशाला में – धातुओं और क्षारों के साथ अभिक्रिया के लिए।
Q.6. साबुन की सफाई क्रिया को चित्र सहित समझाइए। उत्तर: साबुन की सफाई क्रिया
साबुन के अणु के दो भाग होते हैं–
हाइड्रोफोबिक भाग (जल-विरक्त भाग) – जो तेल और गंदगी को आकर्षित करता है।
हाइड्रोफिलिक भाग (जल-प्रिय भाग) – जो पानी को आकर्षित करता है।
जब साबुन को गंदे कपड़े पर पानी के साथ लगाया जाता है, तो
हाइड्रोफोबिक भाग गंदगी/तेल से चिपक जाता है।
हाइड्रोफिलिक भाग पानी की ओर रहता है।
इस प्रकार साबुन के अणु गंदगी को चारों ओर से घेर लेते हैं और माइसिल बनाते हैं।
पानी से धोने पर यह माइसिल गंदगी के साथ बह जाती है और कपड़ा साफ हो जाता है।
साबुन की सफाई क्रिया का चित्र
पानी (Water)
O O O O
| | | |
| | | |
●─────●─────●─────● ← हाइड्रोफिलिक भाग
\ \ \ \
\ \ \ \
████████████████
█ तेल/गंदगी █
█ (Grease) █
████████████████
/ / / /
/ / / /
●─────●─────●─────●
| | | |
| | | |
O O O O
● = साबुन का हाइड्रोफोबिक भाग (तेल से चिपकता है)
O = साबुन का हाइड्रोफिलिक भाग (पानी से चिपकता है)
- साबुन के अणु दो सिरों वाले होते हैं।
- गंदगी के चारों ओर माइसिल बनती है।
- पानी से धोने पर गंदगी हट जाती है।
Q.7. पेट्रोलियम के विभिन्न अंशों और उनके उपयोगों का वर्णन कीजिए।उत्तर:
पेट्रोलियम के विभिन्न अंश एवं उनके उपयोग
पेट्रोलियम एक प्राकृतिक द्रव है। इसे आंशिक आसवन (Fractional Distillation) द्वारा अलग-अलग अंशों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक अंश के अपने विशेष उपयोग होते हैं।
1. पेट्रोलियम गैस (LPG)
उपयोग:
घरेलू ईंधन के रूप में
होटल एवं उद्योगों में ईंधन
2. पेट्रोल (Gasoline)
उपयोग:
कार, स्कूटर, मोटरसाइकिल आदि में ईंधन
ड्राई क्लीनिंग में
3. केरोसिन (मिट्टी का तेल)
उपयोग:
स्टोव और लैम्प में
हवाई जहाजों में ईंधन (एविएशन फ्यूल)
4. डीज़ल
उपयोग:
बस, ट्रक, ट्रैक्टर में ईंधन
जनरेटर चलाने में
5. लुब्रिकेटिंग ऑयल
उपयोग:
मशीनों के पुर्जों में घर्षण कम करने के लिए
ग्रीस बनाने में
6. पैराफिन मोम
उपयोग:
मोमबत्ती, वैसलीन और पॉलिश बनाने में
जलरोधक सामग्री बनाने में
7. बिटुमेन (डामर)
उपयोग:
सड़कों के निर्माण में
छतों की वाटरप्रूफिंग में
निष्कर्ष
पेट्रोलियम से प्राप्त अंश हमारे दैनिक जीवन, परिवहन और उद्योगों में अत्यंत उपयोगी हैं, इसलिए पेट्रोलियम को ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
Q.8. साबुन और डिटर्जेंट में चार अंतर लिखिए।
उत्तर:
साबुन और डिटर्जेंट में अंतर (चार बिंदु)
साबुन वसा एवं तेल से बनाए जाते हैं।
डिटर्जेंट पेट्रोलियम से बनाए जाते हैं।
साबुन कठोर जल में कम प्रभावी होता है।
डिटर्जेंट कठोर जल में भी प्रभावी रहता है।
साबुन कम झाग बनाता है।
डिटर्जेंट अधिक झाग बनाता है।
साबुन आसानी से जैवअपघटित हो जाता है।
डिटर्जेंट पूरी तरह जैवअपघटित नहीं होते, प्रदूषण बढ़ाते हैं।
Q.9. (i) साबुन के निर्माण में प्रमुख दो पदार्थों के नाम लिखिए।
(ii) साबुन का रासायनिक नाम और सूत्र लिखिए।
(iii) साबुन के निर्माण से प्राप्त सह-उत्पाद का नाम बताइए।
उत्तर :
(i) स्टीयरिक अम्ल (C₁₇H₃₅COOH) तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH)।
(ii) साबुन का रासायनिक नाम — सोडियम / पोटैशियम स्टीयरेट।
सूत्र — C₁₇H₃₅COONa या C₁₇H₃₅COOK।
(iii) ग्लिसरॉल।
Q.10. (i) क्या आप डिटर्जेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं?
(ii) मृदु साबुन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
(i) नहीं, क्योंकि डिटर्जेंट दोनों प्रकार के जल के साथ झाग देता है।
(ii) साबुन निर्माण की प्रक्रिया में वसा अथवा तेलों की क्रिया कास्टिक पोटाश से कराने पर मृदु साबुन प्राप्त होते हैं। ये साबुन जल के साथ अधिक झाग देते हैं तथा नहाने आदि के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं।
Q.11. हाइड्रोकार्बन क्या है?
उत्तर: वे कार्बनिक यौगिक जिनमें केवल कार्बन (C) और हाइड्रोजन (H) तत्व होते हैं, हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
Q.12. संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
1. संतृप्त हाइड्रोकार्बन
वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन–कार्बन के बीच केवल एकल बंध (Single bond) पाए जाते हैं, संतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
इनका सामान्य सूत्र CnH₂n+2 होता है।
ये कम क्रियाशील होते हैं और सामान्यतः दहन तथा प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं।
उदाहरण:
मीथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆)
2. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
वे हाइड्रोकार्बन जिनमें कार्बन–कार्बन के बीच दोहरा या तिहरा बंध पाया जाता है, असंतृप्त हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं।
ये अधिक क्रियाशील होते हैं और योग अभिक्रिया करते हैं।
उदाहरण:
एथीन (C₂H₄), एथाइन (C₂H₂)
Q.13. संतृप्त तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
संतृप्त तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अंतर
| आधार |
संतृप्त हाइड्रोकार्बन |
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन |
| बंध का प्रकार |
केवल एकल बंध (Single bond) |
दोहरा या तिहरा बंध |
| सामान्य सूत्र |
CnH2n+2 |
CnH2n / CnH2n-2 |
| क्रियाशीलता |
कम क्रियाशील |
अधिक क्रियाशील |
| अभिक्रिया का प्रकार |
प्रतिस्थापन अभिक्रिया |
योग अभिक्रिया |
| ब्रोमीन जल परीक्षण |
ब्रोमीन जल का रंग नहीं उड़ता |
ब्रोमीन जल का रंग उड़ जाता है |
| उदाहरण |
मीथेन (CH4), एथेन (C2H6) |
एथीन (C2H4), एथाइन (C2H2)
|
Q.14. एल्केन, एल्कीन, एल्काइन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
1. एल्केन (Alkane):
एल्केन वे संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें कार्बन–कार्बन के बीच केवल एकल बंध (Single bond) होता है।
इनका सामान्य सूत्र CnH₂n+2 होता है।
उदाहरण: मीथेन (CH₄), एथेन (C₂H₆)
2. एल्कीन (Alkene):
एल्कीन वे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें कम से कम एक दोहरा बंध (C=C) पाया जाता है।
इनका सामान्य सूत्र CnH₂n होता है।
उदाहरण: एथीन (C₂H₄), प्रोपीन (C₃H₆)
3. एल्काइन (Alkyne):
एल्काइन वे असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें कम से कम एक तिहरा बंध (C≡C) होता है।
इनका सामान्य सूत्र CnH₂n−2 होता है।
उदाहरण: एथाइन (C₂H₂), प्रोपाइन (C₃H₄)
Q.15. योगात्मक अभिक्रिया को एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
उत्तर: योगात्मक अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया है जिसमें किसी असंतृप्त यौगिक (जैसे एल्कीन या एल्काइन) में उपस्थित दोहरा या तिहरा बंध टूटकर उसके साथ कोई दूसरा पदार्थ जुड़ जाता है और एक संतृप्त यौगिक बनता है।
उदाहरण:
एथीन (C₂H₄) में हाइड्रोजन (H₂) मिलाने पर एथेन (C₂H₆) बनता है।
अभिक्रिया:
C₂H₄ + H₂ → C₂H₆
Q.16. बहुलकीकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: बहुलकीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें बहुत-से छोटे अणु (मोनोमर) आपस में जुड़कर एक बड़ा अणु (बहुलक / Polymer) बनाते हैं।
यह प्रक्रिया सामान्यतः असंतृप्त यौगिकों (जिनमें दोहरा बंध होता है) में पाई जाती है।
उदाहरण:
एथीन (C₂H₄) के अनेक अणु आपस में जुड़कर पॉलीथीन बनाते हैं।
अभिक्रिया:
n C₂H₄ → (–C₂H₄–)ₙ
Q.17. ओजोनीकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: ओजोनीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जिनमें दोहरा या तिहरा बंध होता है) की ओजोन (O₃) से अभिक्रिया कराई जाती है।
इस प्रक्रिया में यौगिक का दोहरा बंध टूट जाता है और विशेष प्रकार के यौगिक बनते हैं, जिन्हें ओजोनाइड कहा जाता है।
बाद में ओजोनाइड के अपघटन से एल्डिहाइड या कीटोन प्राप्त होते हैं।
ओजोनीकरण का प्रयोग कार्बनिक यौगिकों में दोहरे बंध की स्थिति ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
उदाहरण:
एथीन (C₂H₄) का ओजोनीकरण करने पर ओजोनाइड बनता है, जो अपघटित होकर फॉर्मेल्डिहाइड देता है।
Q.18. भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल में आप कैसे अंतर करेंगे?
उत्तर:
| आधार |
एथेनॉल (C2H5OH) |
एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) |
| भौतिक गुण |
| अवस्था व रंग |
रंगहीन तरल |
रंगहीन तरल |
| गंध |
हल्की गंध |
तीखी सिरके जैसी गंध |
| स्वाद |
तीखा (नशीला) |
खट्टा |
| क्वथनांक |
लगभग 78°C |
लगभग 118°C |
| रासायनिक गुण |
| लिटमस परीक्षण |
लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं |
नीला लिटमस लाल कर देता है |
| सोडियम से अभिक्रिया |
हाइड्रोजन गैस निकलती है |
हाइड्रोजन गैस निकलती है |
| सोडियम कार्बोनेट से अभिक्रिया |
अभिक्रिया नहीं करता |
CO2 गैस निकलती है |
| अम्लीय प्रकृति |
अम्लीय नहीं |
अम्लीय होता है |
Q.19. हाइड्रोजनीकरण को उदाहरण द्वारा समझाइए तथा एक उपयोग लिखिए।
उत्तर: हाइड्रोजनीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें असंतृप्त यौगिक (जिसमें द्वि या त्रि बंध होते हैं) में हाइड्रोजन गैस (H₂) को निकेल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में मिलाकर उसे संतृप्त यौगिक में बदल दिया जाता है।
उदाहरण:
एथीन का हाइड्रोजनीकरण करके एथेन बनता है—
C₂H₄ + H₂ → C₂H₆
(निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में)
उपयोग:
हाइड्रोजनीकरण का उपयोग वनस्पति तेल को घी (वनस्पति घी/मार्जरीन) बनाने में किया जाता है।
Q.20. किण्वन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: किण्वन वह जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें शर्करा (ग्लूकोज) को यीस्ट (खमीर) की उपस्थिति में, ऑक्सीजन के अभाव में, एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य ताप (30–35°C) पर होती है।
रासायनिक समीकरण:
C₆H₁₂O₆ → 2C₂H₅OH + 2CO₂
उपयोग:
किण्वन का उपयोग अल्कोहल (एथेनॉल) तथा ब्रेड, वाइन, बीयर आदि के निर्माण में किया जाता है।
Q.21. मिसेल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मिसेल साबुन या डिटर्जेंट के अणुओं द्वारा बनाया गया एक गोलाकार समूह होता है, जो पानी में बनने पर तेल या ग्रीस के कणों को अपने भीतर फँसा लेता है। साबुन के अणु का एक सिरा जलस्नेही तथा दूसरा सिरा जलविमुख होता है। जलविमुख सिरे गंदगी से जुड़ जाते हैं और जलस्नेही सिरे पानी की ओर रहते हैं, जिससे गंदगी पानी में घुलकर अलग हो जाती है।
महत्त्व / उपयोग:
मिसेल बनने के कारण ही साबुन और डिटर्जेंट कपड़ों तथा बर्तनों की सफाई कर पाते हैं।
Q.22. साबुनीकरण पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: साबुनीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें वसा या तेल (एस्टर) को क्षार (NaOH या KOH) के साथ गर्म करने पर साबुन और ग्लिसरॉल बनते हैं। यह अभिक्रिया साबुन के निर्माण का आधार है।
सामान्य अभिक्रिया:
वसा/तेल + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल
महत्त्व / उपयोग:
साबुनीकरण का उपयोग साबुन बनाने तथा वसा और तेलों की पहचान में किया जाता है।
Q.23. निम्नलिखित यौगिकों का IUPAC नाम लिखिए—
उत्तर:
(i) CH₃–CH₂–COOH
प्रोपेनोइक अम्ल
(ii) CH₃–C≡C–CH₃
ब्यूट-2-आइन
(iii) CH₃–CH₂–CO–CH₂–CH₃
पेंटएन-3-ओन
(iv) CH₃–C≡CH
प्रोप-1-आइन
(v) CH₃–CH₂–CH₂–CH₂–CH₃
पेंटेन
(vi) CH₃–CO–CH₃
प्रोपेनोन
(vii) CH≡CH
एथाइन
(viii) H — CHO
मेथेनाल
(ix) CH3 — CHO
एथेनाल
(x) CH3 — CH = CH2
प्रोपीन
(xi) CH3 — CH2 — CH2 — Cl
1-क्लोरोप्रोपेन
(xii) CH3 — CH — CH3
|
OH
प्रोपेन-2-ओल
Comments
Post a Comment